हर बात कहने का एक सलीका होता है। काम करने का तरीका होता है। माना कि संजीव गोयनका ने भरी महफिल में केएल राहुल की इज्जत उतारकर अच्छा नहीं किया। पैसों की गर्मी दिखाना तो नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है। आईपीएल में हार से खिसियाने के बाद वह बतौर मालिक लखनऊ सुपरजायंट्स की मीटिंग बुला सकते थे। अपना गुस्सा बंद कमरे में निकाल सकते थे। केएल राहुल की कप्तानी पर सवाल उठा सकते थे। हार का जिम्मेदार ठहरा सकते थे, लेकिन पचासों कैमरा के सामने लाइव टीवी पर इस तरह खिसियाना अमानवीय है। इस बात पर उनकी जमकर क्लास लगनी चाहिए, जो सोशल मीडिया पर बीते 36 घंटे से जारी भी है, लेकिन धन्ना सेठ संजीव गोयनका की इस हरकत की आड़ में केएल राहुल बच नहीं सकते। हमें कहानी का दूसरा पहलू भी समझना होगा। अपनी इस सार्वजनिक बेइज्जती के लिए केएल राहुल भी उतने ही जिम्मेदार हैं। कॉर्पोरेट मजदूर बन चुके क्रिकेटर देखिए ये बात तो पूरी दुनिया मान चुकी है कि क्रिकेट अब खेल से ज्यादा बिजनेस हो चुका है। खासतौर पर आईपीएल। जहां इंटरटेंमेंट, ग्लैमर और पैसे का कॉकटेल बिकता है। क्रिकेट अब जेंटलमेंस गेम से बदलकर पैसे कमाने का अड्डा बना चुका है। इसी...
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